तू जो आ जाये ..तो इस घर को संवरता देखूं ...
एक मुद्दत से जो वीरां है .. वो बसता देखूं ...
ख्वाब बन कर तू बरसता रहे ..शबनम शबनम (मूल- ख्वाब बन कर तू बहाता रहे जन्नत के झरने ..)
और बस मैं इसी मौसम को निखरता देखूं ...
जिससे मिलना ही नहीं उससे मोहब्बत कैसी ..
सोचता जाऊं ... मगर दिल में उतरता देखूं .....
दिल गया था तो ये आँखें भी कोई ले जाता ....
मैं फ़क़त एक ही तस्वीर कहाँ तक देखूं ....
चंद लम्हे जो तेरे इश्क़ के मिल जाते हैं ..
इन्ही लम्हों को मैं सदियों में बदलता देखूं ...
तू जो आ जाये ..तो इस घर को संवरता देखूं ...
एक मुद्दत से जो वीरां है .. वो बसता देखूं ...
-फैज़ल
नए सबक, नए पहलू और नए नज़रिए सिखलातीं, दिखातीं और बनातीं कुछ असहज घटनाओं को सहजता से लेने का सब से अच्छा तरीका है, अपने आप से ये कहना कि " ऐसा भी होता है"!
शनिवार, 6 अप्रैल 2013
शनिवार, 30 मार्च 2013
गुरुवार, 28 मार्च 2013
Bilaspur Press Club Me Holi 2013
इस साल बिलासपुर प्रेस क्लब में होली शानदार रही। पहले नगाड़ों की थाप और बाद में फाग पर सदस्यों ने जमकर ठुमके लगाये
शुक्रवार, 22 मार्च 2013
Rang Daalo ....
उस्ताद अहमद हुसैन-मोहम्मद हुसैन, बिलासपुर में
मित्रों की मांग पर एक क्लिप- ...होली हैं ना ...
मित्रों की मांग पर एक क्लिप- ...होली हैं ना ...
रंग डालो .. तन-मन की बगिया, फागुन बन कर आ जाओ,
बरस पड़ो दिल के आँगन में ... रंगों की बरसात लिये ...
बोल रहा था कल वो मुझको, हाथ में मेरा हाथ लिये ...
-क़तील राजस्थानी, राग यमन .
एल्बम- राहत, सा रे गा मा। .
शनिवार, 24 नवंबर 2012
परी हूँ मैं ......
परी हूँ मैं ......
छत्तीसगढ़ में राउत-नाचा में गड़वा बाजा जितना जरूरी है उतना ही जरूरी है उनके साथ नचकहारों का होना। राउत नाचा वाली बाजा पार्टी में इन्हें परी कहा जाता है, इसमे मुख्य बात ये है कि ये भूमिका लड़के ही निभाते हैं। चिल्फी के ऐसे ही एक युवा सुरेन्द्र परी बनते हैं, आज से चार पांच साल पहले मैंने मुंबई के कैलाशम कार्तिक कौशिक के साथ सुरेन्द्र से लम्बी बात की थी। आप सबकी नज़र कर रहा हूँ। इसकी शुरुआत में सुनीता राव के गाये गीत "परी हूँ मै .." को प्रासंगिक समझ के पार्श्व में लिया है, जो सुनीता के एल्बम "धुन" से है, इसकी प्रोडक्शन कम्पनी का नाम मुझे नहीं पता? गर आपको पता हो तो बताएं.
In Bilaspur area of Chhattisgarh there is tradition of The Yadavs that their teams take round of Shanichari bazaar (Old Market place for Cows) on the second Saturday after Devuthni Ekadashi. In past it was quite unregular and mostly ended with the battles of Goles (teams) every year. Then some intellectuals of yadav society came forward to regularize this tradition and gave it a shape of healthy competition. Now its runs whole night and in the morning, Big Shields and Trophies are there for the winners in various categories.
There are too many things to watch and read about this function and the participants like their Bazaa Party, their dresses, Dohe, Song's etc. etc.. One thing which attracts me is Pari' (two is common) in each team. Men dressed in ladies wear and act like female dancer of the team (ladies are not allowed in teams cause Shourya' is meant for the males only). We had a talk with one of them, Surendra from Chilfi.
छत्तीसगढ़ में राउत-नाचा में गड़वा बाजा जितना जरूरी है उतना ही जरूरी है उनके साथ नचकहारों का होना। राउत नाचा वाली बाजा पार्टी में इन्हें परी कहा जाता है, इसमे मुख्य बात ये है कि ये भूमिका लड़के ही निभाते हैं। चिल्फी के ऐसे ही एक युवा सुरेन्द्र परी बनते हैं, आज से चार पांच साल पहले मैंने मुंबई के कैलाशम कार्तिक कौशिक के साथ सुरेन्द्र से लम्बी बात की थी। आप सबकी नज़र कर रहा हूँ। इसकी शुरुआत में सुनीता राव के गाये गीत "परी हूँ मै .." को प्रासंगिक समझ के पार्श्व में लिया है, जो सुनीता के एल्बम "धुन" से है, इसकी प्रोडक्शन कम्पनी का नाम मुझे नहीं पता? गर आपको पता हो तो बताएं.
In Bilaspur area of Chhattisgarh there is tradition of The Yadavs that their teams take round of Shanichari bazaar (Old Market place for Cows) on the second Saturday after Devuthni Ekadashi. In past it was quite unregular and mostly ended with the battles of Goles (teams) every year. Then some intellectuals of yadav society came forward to regularize this tradition and gave it a shape of healthy competition. Now its runs whole night and in the morning, Big Shields and Trophies are there for the winners in various categories.
There are too many things to watch and read about this function and the participants like their Bazaa Party, their dresses, Dohe, Song's etc. etc.. One thing which attracts me is Pari' (two is common) in each team. Men dressed in ladies wear and act like female dancer of the team (ladies are not allowed in teams cause Shourya' is meant for the males only). We had a talk with one of them, Surendra from Chilfi.
शनिवार, 20 अक्टूबर 2012
इनसे मिलिये- अजीत रॉय, कोलकाता, Ajit Roy.
इनसे मिलिये- अजीत रॉय, कोलकाता.
वर्ष २०१० में संतोष कुमार जी के साथ, लेह प्रवास से लौटते समय लेह-मनाली मार्ग में बारलाचा ला के बाद, तंगलंग ला के आगे २४ जून की रात हमने एक टेंट में गुजारी. -2 तापमान था. उसके बाद 25 जून को रोहतांग की और बढ़ते हुए शाम को दारच्चा के पहले एक सज्जन अपने दो नन्हे मुन्नों के साथ बुलेट में साजो सामान के साथ दिखे. बच्चों को देख हम हैरत में पड़ गए. रास्ते में एक पहाड़ी नाला पार करते समय हमने देखा कि नाले के पहले उन्होंने अपनी बुलेट को रोक, बच्चों को एक-एक कर गोद में उठा कर पैदल नाला पार कर, दूसरी ओर छोड़ वापस आकर बुलेट स्टार्ट कर नाला पार किया. समझ में आया कि वो एहतियातन ऐसा कर रहे हैं क्योंकि उस दुर्गम क्षेत्र में जहां नालों में गोल-गोल पत्थर होते हैं, वहाँ दो पहिया वाहनों के पलटने का पूरा अंदेशा रहता है( हमने 40 % को पलटते देखा).
वर्ष २०१० में संतोष कुमार जी के साथ, लेह प्रवास से लौटते समय लेह-मनाली मार्ग में बारलाचा ला के बाद, तंगलंग ला के आगे २४ जून की रात हमने एक टेंट में गुजारी. -2 तापमान था. उसके बाद 25 जून को रोहतांग की और बढ़ते हुए शाम को दारच्चा के पहले एक सज्जन अपने दो नन्हे मुन्नों के साथ बुलेट में साजो सामान के साथ दिखे. बच्चों को देख हम हैरत में पड़ गए. रास्ते में एक पहाड़ी नाला पार करते समय हमने देखा कि नाले के पहले उन्होंने अपनी बुलेट को रोक, बच्चों को एक-एक कर गोद में उठा कर पैदल नाला पार कर, दूसरी ओर छोड़ वापस आकर बुलेट स्टार्ट कर नाला पार किया. समझ में आया कि वो एहतियातन ऐसा कर रहे हैं क्योंकि उस दुर्गम क्षेत्र में जहां नालों में गोल-गोल पत्थर होते हैं, वहाँ दो पहिया वाहनों के पलटने का पूरा अंदेशा रहता है( हमने 40 % को पलटते देखा).
थोड़ी दूर पर फिर एक नाला आया, इस बार हम उनके पीछे थे. उन्होंने हम से सहायता मांगी कि हम उनके बच्चों को कार से नाला पार करा दें, हम सहर्ष तैयार हो गये. इसी बहाने उनसे बात हो गयी. पता चला कि ये श्री अजीत राय हैं, कोलकाता के रहने वाले हैं, भारतीय वायुसेना में हैं ऑर अपने शौक के कारण दिल्ली से बुलेट किराये पर ले, बच्चों(बेटी चिंगू, बेटा सिद्धांत) के साथ हिमालय की सैर कर रहें हैं.
सोमवार, 1 अक्टूबर 2012
ऐसा भी होता है...
बिलासपुर, छत्तीसगढ़. आज भारतीय स्टेट बैंक की नई नीति से सामना हुआ. मेरे घर से चन्द कदमो की दूरी पर है स्टेट बैंक की श्रीकांत वर्मा मार्ग शाखा. इस शाखा में मैं अपनी बिटिया के लिए बचत खाता खुलवाने पहुंचा तो जो जवाब मिला उसके सदमे से अभी तक नहीं उबर पा रहा हूँ. सामने की टेबल पर बैठे सज्जन से जब मैंने पूछा कि बिटिया के नाम से खाता खुलवाना है क्या-क्या कागज़ लगेंगे, क्या-क्या औपचारिकतायें पूरी करनी पड़ेंगी? तो जवाब मिला पैनकार्ड और पहचान पत्र, मैंने कहा बेटी तो स्टुडेंट है उसका पैनकार्ड नहीं है, आप कुछ और बताएं..? जवाब मिला "यहाँ स्टुडेंट्स के खाते नहीं खोले जाते". मैं हतप्रभ रह गया, पूछा क्यों? उन सज्जन ने तुरंत अन्दर बैठे एक अधिकारी की ओर इशारा कर कहा कि आप ब्रांच मैनेजर से बात कर लें. मैं ब्रांच मैनेजर के पास पहुंचा और कहा कि मेरी बेटी बालिग है उसका एकाउंट यहाँ क्यों नहीं खुल सकता?
बिलासपुर छत्तीसगढ़ की भारतीय स्टेट बैंक की श्रीकांत वर्मा मार्ग के ब्रांच मैनेजर ए के घोष ने जवाब दिया " आप अपना खाता खोलें कोई दिक्कत नहीं है, लेकिन स्टुडेंट्स के खाते इस ब्रांच में नहीं खोले जाते", मैंने पूछा आखिर क्यों? तो उन्होंने एक काउंटर की तरफ इशारा करते हुए कहा कि " देख लीजिये ये हज़ार- दो हज़ार वाले कैसे लाइन बड़ी किये पड़े हैं और हमारे बड़े ग्राहक पीछे हो गयें हैं. स्टुडेंट्स रोज़ ऐसी ही भीड़ लगायेंगे तो हमारे बड़े ग्राहकों को परेशानी होगी और फिर ऊपर से भी आदेश हैं". उस ब्रांच से बाहर निकलने के अलावा कोई विकल्प नहीं था.
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