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रविवार, 28 अगस्त 2011

अब कितने दिन में?

अन्ना के अनशन पर कुछ मैं भी लिख दूं ये सोच कर बैठा, अभी नोटिफिकेशन ही देख रहा था कि बगल में मेरा बेटा आ बैठा, कक्षा नवमी का छात्र है. पूछने लगा कि अब कितने दिन में प्रधानमंत्री और बाकी मुख्यमंत्रियों का पैसा जब्त होके सरकारी खजाने में आ जायेगा? मेरा मुंह खुला रह गया, मैं कुछ बोल पाता इससे पहले उसने एक और सवाल दाग दिया क्या ये सही है कि विदेशों में जमा पैसा वापस आने पर दस साल तक इस देश में टैक्स नहीं लगेगा? ऐसा कब होगा? और... और....... मैंने कहा बस कर और उससे पूछा किसने तुम से ये सब कहा है? जवाब आया ये बातें तो रोज़ हमारे स्कूल में साथी लोग कह रहे हैं.
अब मैंने सब काम छोड़ कर उसे लोकपाल और जनलोकपाल का मतलब बताया, स्थाई समिति के बारे में बताया, ये भी बताया कि विदेश में जमा धन वापस लाने का आन्दोलन रामदेव बाबा का था. आधे घंटे की इस क्लास में उसे कितना समझ में आया? ये तो मैं नहीं जानता लेकिन सिटीजन चार्टर की बात पर ये जानकर कि  अधिकारियों की तनखा से जुर्माने की राशि कटेगी उसे मजा आ गया. अभी भी वो मेरी बगल में बैठा है मुझे ये लिखते देख कर कह रहा है, पापा काफी हद तक सब समझ में आ गया है.......?

गुरुवार, 18 अगस्त 2011

मैं अण्णा!

सोलह अगस्त के बाद अन्ना होने के मायने बदल गए हैं. "मैं अन्ना का" नारा भी स्वस्फूर्त हो गया है.
बचपन से सुनते आये हैं "हर शाख पे उल्लू बैठा है, अंजामे गुलिस्तां क्या होगा"?
आज कल्पना कर रहा हूँ- "जब हर शाख पे एक अन्ना होगा, रंग ए हिन्दुस्तां क्या होगा?