बुधवार, 20 जुलाई 2011

AIRTEL का 198... शिकायत की क्या?




 अब जबकि फोन खिलौना हो गया है, निजी कंपनियों ने ग्राहक सेवा के मायने बदल कर रख दिए हैं बावजूद इसके एक नई समस्या पैदा हो गई है. अगर आपके यहाँ एयरटेल (निजी कंपनी) का फोन लगा है तो आप भी इससे रूबरू हो चुके होंगे, अगर नहीं तो तैयार हो जाइए. ये समस्या तब उपजती है जब आपका फोन खराब हो जाता है और उसकी शिकायत दर्ज करानी होती है. सबसे पहले अपने ऐसे परिचित को खोजना पड़ता है जिसके यहाँ उसी कंपनी का फोन हो, उनके यहाँ अनुमति लेने के बाद 198 डायल कीजिये..... कुछ सेकेण्ड संगीत सुनिए, फिर आवाज़ आएगी +ये नंबर शिकायत दर्ज कराने के लिए है, अगर आपको बिल या अन्य सेवाओं सम्बंधित कोई जानकारी चाहिए तो कृपया 121 डायल करें+... फिर संगीत.... उसके बाद आपको उस फोन के बिल का हाल सुना दिया जाएगा, संगीत... आवाज़ ..अंग्रेजी के लिए एक... हिंदी के लिए दो डायल करें संगीत..... आवाज़... इसी नंबर की शिकायत के लिए एक, अन्य नंबर के लिए दो डायल करें,   संगीत.... फिर कुछ इस तरह के अनुरोध ... लाइन में खराबी के लिए एक, इंस्ट्रूमेंट में खराबी के लिए दो, फोन पूरी तरह से बंद है तो तीन डायल करें..... हमारे अधिकारी से बात करने के लिए नौ डायल करें,  फिर संगीत.. फोन से ज़रा नज़र हटा कर देखेंगे तो पता चलेगा कि तीन मिनट से ऊपर हो चुके हैं और फोन का मालिक आपको घूर रहा है, आप असहज हो जातें हैं, उधर फोन पर आवाज़ आ रही है कि आपकी काल हमारे अधिकारी के पास ट्रांसफर की जा रही है..... जो रिकार्ड भी की जा सकती है..... आपका काल हमारे लिए महत्वपूर्ण है कृपया लाइन पर रहें.... पांच मिनट हो चुके हैं अब फोन मालिक को शक होने लगता है कि ये शिकायत का नाम ले कर भविष्यवाणी तो नहीं सुन रहा है? जिसका बिल तगड़ा आता है.... और फोन कट जाता है... शिकायत दर्ज नहीं हुई.. फिर वही सिलसिला.. वही दोहराव... अंत में अधिकारी हाज़िर होतें हैं... नमस्कार मैं फलां बोल रहा/रही हूँ मैं आपकी क्या सहायता कर सकता हूँ.... आप अपना नंबर बताएँगे... वहाँ से एस टी डी कोड पूछा जाएगा, फिर आपका नाम, पता, इ मेल आई डी, मोबाइल नंबर की जानकारी ली जायेगी, फिर पूछ जाएगा क्या आपने अपना इंस्ट्रूमेंट चेक किया है? लाइन चेक की? डिब्बी देखी आदि-आदि... जब तक आप आपनी खोपड़ी के बाल नहीं नोचने लगेंगे तब-तक वहां से पूछताछ जारी रहेगी... और अंत में कम्प्लेंट नंबर इतना लंबा बताया जाएगा कि याद रखना मुश्किल. एक शिकायत दर्ज कराने में इतना समय, अब तो ये हाल है कि किसी के यहाँ आप पहुँच कर कहेंगे कि फोन की शिकायत करनी है तो हो सकता है कि जवाब आये.. अरे मेरा भी फोन खराब है....?

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हाथ में मोबाइल लेकर घूम रही नई पीढ़ी को फोन पाने का वो दर्द नहीं मालूम है जो हमारी उम्र ने झेला है. नंबर लगाने के बाद लंबा इन्तजार, लाइनमैन देवदूत लगता था,  दूर से उसे आते देख लपक पड़ते थे हमारा नंबर आया क्या? मायूसी ही हाथ लगा करती थी. फिर सांसद कोटे के लिए प्रयास.... और अंत में ओ वाय टी स्कीम में साढ़े सात  हज़ार जमा करने के हफ्ते भर बाद दो लोग आये और घर की बालकनी में लोहे का एंगल ठोक, उसमे चीनी-मिटटी की गुम्बदनुमा आकृति लगा, चाय-नाश्ता कर विदा हो गए. तय हो गया कि फोन लगने वाला है. अडोस-पड़ोस से जलने कि बू के साथ बधाई सन्देश आने लगे. अब इन्तजार था उन तारों का जिन पर चल कर लाइन आती, फिर दो तीन दिन गुजर गए, देवदूत को पकड़ा तो उसने बताया कि आपके घर के पास के खम्बे में लगी डी बी में जगह नहीं है, साहब से बोल कर लंबा तार दिलवाइए. एक और कवायद हुई तब जा के फोन लगा. ग्राहक सेवा का हाल सरकारी ही था, एस टी डी सुविधा तब शुरू नहीं हुई थी, दूसरे शहर बात करनी हो तो ट्रंक बुक करो उसके बाद सबकुछ छोड़ के फोन के पास घंटो बैठे रहो न जाने कब काल लग जाए, विपत्ति में चार गुना रेट पर लाइटनिंग काल किये जाते थे.

बुधवार, 13 जुलाई 2011

रविवार, 26 जून 2011

खबर, खबर होती है दोस्ती यारी नहीं....


शनिवार को छत्तीसगढ़ के बिलासपुर स्टेशन में बम की खबर से अफरा-तफरी मच गई, दूरदर्शन रायपुर के न्यूज़ रूम तक ये खबर सबसे पहले पहुंची. वहाँ से बिलासपुर की टीम को तुरंत बिलासपुर स्टेशन पहुँच रिपोर्ट करने के लिए कहा गया. खबर उस समय बिलासपुर स्टेशन में खड़ी संपर्क-क्रांति में बैठे किसी यात्री के माध्यम से मिली थी सो सन्देश ये चला गया कि उस ट्रेन में बम है. दस मिनट में टीम स्टेशन के सामने थी. कहाँ है बम? टीम लीडर (अपना नाम लेते शर्म आ रही है) को होशियारी सूझी, उसने रेलवे के जनसंपर्क विभाग से जानकारी मांगी. शनिवार को रेलवे में छुट्टी होती है इसलिए अधिकारी दफ्तर में नहीं थे. फिर भी फोन पर उन्होंने कहा अभी पता करता हूँ. बाद में उन्होंने स्टेशन इंचार्ज भट्टाचार्य के हवाले से खबर दी कि ऐसी कोई बात नहीं है और संपर्क-क्रांति रवाना हो चुकी है.
पुनः: उनसे कहा गया सूचना पक्की है, स्टेशन में पुलिस की सरगर्मी देखी गई है. उन्होंने कहा टिकट चेकिंग हो रही होगी, बम-वम का कोई मामला नहीं है. कैमरा टीम वहाँ से वापस हो गई.
स्टेशन के चौराहे में खड़े होकर सब कुछ जान लेने की होशियारी से ये खबर दूरदर्शन के हाथ से निकल गई. चार कदम चल कर अन्दर झाँक लेते तो बात कुछ और होती.
सबक मिला कि खबर, खबर होती है दोस्ती यारी नहीं.
तस्वीर बिलासपुर भास्कर से.

बुधवार, 22 जून 2011

ये है कशिशे हुस्न......

कुछ बरस पहले एक जूनियर ने एक लेपटॉप लिया और कुछ सीखने की गरज से मेरे पास आ बैठा, मैंने उसके लेपटॉप का निरीक्षण शुरू किया, नज़रें ऐश्वर्या राय के वालपेपर्स पर रुक गयीं. वो मुंहलगा था फ़ौरन पूछ बैठा क्या देखने लगे बुढऊ?
उस समय मेरे मुंह में किसी शायर का ये शेर आते-आते रह गया और मैं झेंप कर रह गया. आज ये शेर याद आया है-
ये है कशिशे हुस्न, के है हसरते दीदार?
ताक़त नहीं है बाक़ी, मगर देख रहा हूँ......

अभी कुछ देर पहले अमिताभ जी ने ट्वीट किया है "ऐश्वर्या माँ बननेवाली हैं और मैं दादा"...
सवाल- मामा कितने बन रहें हैं?

बुधवार, 8 जून 2011

ये देश है वीर जवानो का........

ये देश है वीर जवानो का........
लानत है उस पर जो देश भक्ति के शौर्य से ओतप्रोत इस गीत पर न झूमे. इसको मुद्दा बना के शोर उत्पन्न कर रहे लोगों को जरूरत है सेंटर-फ्रेश च्यूंगम की जो उनकी जुबान पर ताला रखे. अरे! उस वक़्त यदि गांधी जी की समाधि की ओर कैमरा घुमाते तो इस धुन पर उनकी रूह भी झूमती दिख जाती....काहे का देश का अपमान?
 रही बात घायलों को भुला कर नाचने की, तो याद रखिये अपने तीन सौ साथियों की लाशों पर दौड़ कर गए थे नीले सितारे वाले आपरेशन के जवान और फतह के बाद हर्ष फायर कर रहे थे... हाल ही में जब कारगिल पर तिरंगा लहरा के जवान झूम रहे थे तो सामने उनके ही साथियों की लाशें भी पड़ी थीं. दुःख और पीड़ा अपनी जगह है देश भक्ति का जज्बा अपनी जगह है....... अभद्र भाषा का उपयोग करने वालों के लिए उन्ही के जवाब में मेरी जुबान पर एक से बढ़ कर एक शब्द आ रहें हैं लेकिन उन्हें उच्चारित करने के लिए ये उचित जगह नहीं है इसलिए फिलहाल मैं ही सेंटर-फ्रेश चबा रहा हूँ.

बुधवार, 18 मई 2011

गूगल अकाउंट हैक

न जाने किसी को मेरा गूगल अकाउंट हैक करने की क्या जरूरत पड़ती है? हैक करने के बाद मुझे दो तीन कम्युनिटी का सदस्य भी बना दिया जाता है और तो और न जाने क्या हरक़त करतें हैं कि ब्लॉगपोस्ट से मेरा ब्लॉग ही उड़ जाता है. फिर मुझे वेर्रीफिकेशन से गुजरना पड़ता है, सारे समर्थक गायब हो जातें हैं.  ऐसा तीसरी बार हुआ है.

शुक्रवार, 6 मई 2011

May be Radio tracking system helpful for missing choppers?

कैसी विडम्बना है कि पिछले कई बरसों से हम भारत में हेलीकाप्टरों के लापता होने और फिर उनकी रात-दिन युद्ध स्तर पर खोज के समाचारों, उसमे सवार लोगों की सलामती की दुआओं, वायु सेना की सहायता, इसरो की मदद...... आदि-आदि सुर्ख़ियों के आदी हो चलें हैं, लेकिन किसी भी जिम्मेदार संस्था ने ऐसा कोई उपाय नहीं सुझाया जिससे लापता हुए विमानों और हेलीकाप्टरों को जल्द से जल्द लोकेट किया जा सके?



वहीँ दूसरी ओर पूरी दुनिया में व इस देश में भी रेडियो ट्रेकिंग सिस्टम आ चुका है जिसकी सहायता से जंगली जानवरों से लेकर, पानी में रहने वाले प्राणियों और हवा में उड़ने वाले पंछियों में टैग लगाकर उन पर नज़र रखी जाती है और उनके व्यवहार का अध्ययन किया जा रहा है. पिछले दिनों अमेरिका में कुछ भारतीय छात्रों के पैरों में भी इसी तरह की बेड़ियाँ बाँध दी गईं थी जिस पर काफी शोर-शराबा हुआ था.