मंगलवार, 15 मार्च 2011

कलावीथिका का दीपक

बिलासपुर के राघवेन्द्र राव सभा भवन में लगी प्रदर्शनी को देखने, सोमवार दोपहर जब मैं वहाँ पहुंचा तो हैरत में पड़ गया, अन्दर की साज सज्जा भव्य थी. लगा ही नहीं कि मैं बिलासपुर में हूँ. प्रदर्शित कलाकृतियों को बारे में कला मर्मज्ञ लोग टिप्पणी करेंगे, मैं तो वहाँ अभिभूत होने गया था. रात को दुबारा गया. अंत में ये सुन कर बुरा लगा कि चर्चाएँ तो हुईं लेकिन एक भी कलाकृति बिकी नहीं.  मुझे प्रभावित किया वहाँ के दीपस्तंभ ने भी, कलावीथिका का दीपक सामान्य कैसे हो सकता है? हर तरह से वह विशिष्ट था. मैंने पाया कि उसकी विशेष देखभाल भी होती है. अंतिम दिन था लेकिन फिर भी स्तम्भ के चारों तरफ के फूलपत्तियों को साफ़ कर पलाश के फूलों से वहाँ घंटों की मेहनत से नई आकृति उकेरी गई. मैं भी जमा रहा ये देखने कि आखिर ये कर क्या रहें हैं? साथ ही मोबाइल से तस्वीरें भी लेता रहा. आप भी देखें और हाँ ध्यान से!


1 टिप्पणी:

  1. कोलाज बहुत शानदार था
    कलाकारों की मेहनत और रचनात्मकता देखने को मिली
    आप का भी धन्यवाद जो आपने इन रचनात्मक और कलात्मक कृतियों को अपनी पोस्ट में स्थान दिया

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